यह पोस्ट बिहार और उड़ीसा लोक मांग वसूली अधिनियम, 1914
सर्टिफिकेट को सही माना जाता है जब तक कि उसे चुनौती न दी जाए।
बीसवीं सदी की शुरुआत में, भारत ब्रिटिश शासन के अंतर्गत था। उस समय बिहार और उड़ीसा (वर्तमान ओडिशा) बंगाल प्रेसीडेंसी का हिस्सा थे। 1912 में एक ऐतिहासिक बदलाव हुआ—बंगाल का विभाजन हुआ और बिहार और उड़ीसा को एक अलग प्रांत (Province) का दर्जा दिया गया।
"Bihar and Orissa Public Demand Recovery Act 1914 हिंदी pdf" filetype:pdf
सार्वजनिक मांग की परिभाषा (धारा 3(6)): इसमें सरकारी राजस्व, ऋण, बैंकों से लिया गया लोन (अधिसूचित), और अनुसूची-1 में वर्णित विभिन्न प्रकार के बकाया शामिल हैं।
बिहार और उड़ीसा लोक मांग वसूली अधिनियम, 1914 (Bihar and Orissa Public Demands Recovery Act, 1914) सरकार को बकाया राजस्व, कर और अन्य ऋणों की त्वरित वसूली के लिए एक कानूनी ढांचा प्रदान करता है। यह अधिनियम 1 जुलाई 1914 को लागू हुआ और आज भी बिहार और झारखंड जैसे राज्यों में सरकारी बकाया वसूलने के लिए मुख्य साधन है।